हल्दी के अद्भुत फायदे और सावधानियां | Haldi ke adhbhut fayde aur savdhaniya
हल्दी के पौष्टिक तत्व
पोटेशियम ( potassium)
आयरन ( Iron)
मैंगनीज ( Manganese)
जिंक ( Zinc )
विटामिन सी ( Vitamin C)
विटामिन ई (Vitamin E)
नियासिन ( Niacin )
विटामिन बी6 ( Vitamin B6 )
डाइटरी फाइबर ( Dietary fiber )
फोलेट आदि (Folate) etc.
आमतौर पर हल्दी का उपयोग भोजन बनाते समय मसालों के तौर पर किया जाता है। भारत में हल्दी का प्रयोग मांगलिक कार्यों विवाह इत्यादि के समय भी किया जाता है। इसके अलावा हल्दी में कई औषधीय गुण भी होते हैं। हल्दी का उत्पादन जमीन के अंदर जड़ के रूप में होता है। हल्दी का पौधा लगभग 1 से 2 फुट ऊंचा हो सकता है। जड़ को जमीन से निकालकर उसका पाउडर बनाकर प्रयोग किया जाता है। कुछ लोग सीधे जड़ को भी सब्जी के रूप में प्रयोग करते हैं। हल्दी में कई तरह के पोष्टिक तत्व के साथ औषधीय गुण भी होते हैं जो कई प्रकार से हमारे लिए उपयोगी हैं।
हल्दी के फायदे
पाचन तंत्र के लिए
लीवर के स्वास्थ्य के लिए
रोग प्रतिरोधक क्षमता का सुधार
मधुमेह रोग में सुधार
कैंसर की रोकथाम के लिए
वजन संतुलित रखने के लिए
ह्रदय रोग में लाभदायक
मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में
जोड़ों के दर्द व सूजन के लिए
सर्दी खांसी में उपयोगी
त्वचा के लिए
बालों के लिए
दांतो के लिए
घाव या चोट को ठीक करने में
आंखों के लिए
1.पाचन तंत्र के लिए
पाचन तंत्र में गड़बड़ी को ठीक करने में हल्दी बहुत उपयोगी होती है। रोजाना भोजन में हल्दी का प्रयोग करने से कई तरह के पेट के रोग जल्दी ठीक हो सकते हैं। हल्दी के सेवन रोजाना करने से शरीर में पित्त ज्यादा बनता है और भोजन को पचने में आसानी रहती है। पेट में गैस हो जाने पर पाचन तंत्र को नुकसान हो सकता है। इसका इलाज हल्दी में मौजूद एंटी इंफ्लमेरी व एंटी ऑक्सीडेंट गुणों के कारण संभव हो सकता है।
2.लीवर के स्वास्थ्य के लिए
हल्दी के उपयोग से लीवर को स्वस्थ रख सकते हैं। हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट्स गुण होते हैं जिससे हल्दी लीवर के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। हल्दी लीवर को संक्रमण से भी बचाती है।
3.रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार
हल्दी में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होता है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुधारने का कार्य करता है। रोग प्रतिरोधक प्रणाली वायरस और बैक्टीरिया से शरीर की रक्षा करती है। शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए हल्दी सबसे अच्छी घरेलू औषधि है। हल्दी एंटीसेप्टिक एंटी बैक्टीरियल एंटी इन्फ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती है।
4.मधुमेह रोग में सुधार
भागदौड़ भरी जीवनशैली के कारण ज्यादातर लोग मधुमेह से पीड़ित रहते हैं। डायबिटीज शरीर के लिए हानिकारक बीमारी है। हल्दी के सेवन से इम्यून सिस्टम बेहतर हो सकता है। हल्दी में इंसुलिन को संतुलन रखने का गुण होता है, जिससे यह मधुमेह के रोगियों के लिए लाभदायक है। इसके अलावा हल्दी ग्लूकोज को नियंत्रण कर सकती है। जिससे मधुमेह के दौरान दी जाने वाली दवाओं का असर बढ़ जाता है।
5.कैंसर की रोकथाम में
हल्दी में कैंसर के प्रतिरोध का गुण होता है। हल्दी कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ यह उन्हें समाप्त भी कर देती है। कई वैज्ञानिक शोध में यह माना गया है कि कैंसर की रोकथाम में हल्दी का उपयोग किया जा सकता है।
6.हृदय रोग में लाभदायक
जिन लोगों को हृदय संबंधित रोग होते हैं उन्हें हल्दी के सेवन से लाभ मिलता है। हल्दी खून को गाढ़ा होने से रोकती है। हल्दी का योगिक करक्यूमिन खराब कोलेस्ट्रोल को कम करता है और अच्छे कोलेस्ट्रोल के स्तर को बढ़ाता है। इस प्रकार हल्दी से दिल के दौरे की संभावनाओं को कम किया जा सकता है।
7.मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में
हल्दी न केवल खाने के स्वाद को बढ़ाती है बल्कि यह एक घरेलू औषधि भी है। एक अध्ययन में सामने आया है कि हल्दी में मौजूद करक्यूमिन तत्व याददाश्त को बढ़ाने और तनाव को कम करने में सहायक है। हल्दी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण मस्तिष्क को सुरक्षा प्रदान करते हैं।
8.जोड़ों के दर्द और सूजन के लिए
ज्यादा वर्कआउट करने से या अन्य किसी कारण से मांसपेशियों में दर्द और सूजन रहती है या फिर घटिया रोग है जिसके कारण जो दो जोड़ों में दर्द रहता है तो हल्दी में मौजूद करक्यूमिन,एंटी एक्सीडेंट इससेे छुटकारा दिलाने में सहायक है।
9.सर्दी खांसी में उपयोगी
सर्दी के मौसम में ईम्युनिटी कमजोर हो जाती है। इस कारण सर्दी के मौसम में जुखाम खांसी और अन्य मौसमी बीमारियां हो सकती है। ऐसे में हल्दी का सेवन इस मौसम में जरूर करना चाहिए। हल्दी ईम्युनिटी बूस्टर की तरह काम करती है। हल्दी एंटीबैक्टीरियल और एंटी एलर्जी की तरह काम करती है।
10.त्वचा के लिए
हल्दी में एंटीसेप्टिक एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जिससे हल्दी के प्रयोग से मुहांसों को दूर किया जा सकता है। त्वचा को निखारने के लिए हल्दी के प्रयोग से कई तरह के फैसपेक बनाए जाते हैं।
11.बालों के लिए
डैंड्रफ रोकने के लिए हल्दी का प्रयोग किया जा सकता है। हल्दी में मौजूद एंटीसेप्टिक गुणों के कारण डैंड्रफ से होने वाली खुजली में फायदा मिलता है। बाल झड़ने की समस्या कम करने के लिए भी हल्दी का प्रयोग किया जा सकता है। तनाव या सही पोषण नहीं मिलने के कारण झडने वाले बालों को बचाने के लिए हल्दी का प्रयोग किया जा सकता है। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन तत्व बालों के झड़ने से रोकने में मदद करता है।
12.दांतों के लिए
दांतों का पीला होना या दातों पर दाग होना दांतों की आम समस्या है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए हल्दी से दांत साफ कर सकते हैं और फिर साफ पानी से कुल्ला करें। दांतों में दर्द होने पर सरसों का तेल और हल्दी की मालिश कर सकते हैं। हल्दी में मौजूद एंटी बैक्टीरियल और एंटी इन्फ्लेमेटरी गुणों के कारण मसूड़ों के स्वास्थ्य के साथ-साथ दातों में बैक्टीरियल संक्रमण को भी रोका जा सकता है।
13.घाव व चोट को ठीक करने में
चोट पर हल्दी का लेप लगाने से चोट जल्दी ठीक हो सकती है। एक गिलास दूध मे छोटा चम्मच हल्दी मिलाकर पीने से दर्द में राहत मिलती है।
14.आंखों के लिए
हल्दी का लेप आंखों के नीचे लगाने से काले घेरे और झुर्रियां जल्दी ठीक होती है। नियमित रूप से हल्दी लेप करने से हल्दी में मौजूद एंटी एजिंग और एंटीसेप्टिक गुणों के कारण भविष्य में इन समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता। आंखों का यह हिस्सा संवेदनशील होता है इसलिए किसी अच्छे मॉइश्चर एजेंट के प्रयोग करने के बाद हल्दी लेप का प्रयोग करें और ठंडे पानी से धो लें।
हमें पता है कि हल्दी से स्वास्थ्य को कई तरह के फायदे होते हैं लेकिन हल्दी के संयमित उपयोग से ही हमें फायदा मिल सकता है। यदि आवश्यकता से अधिक हल्दी का प्रयोग किया जाए तो इससे नुकसान भी हो सकता है। इसलिए हल्दी का उपयोग ज्यादा मात्रा में नहीं करना चाहिए।
सावधानियां
अगर आपको मधुमेह है तो हल्दी वाला दूध ज्यादा पीना हानिकारक हो सकता है क्योंकि हल्दी में करक्यूमिन नामक तत्व होता है जो ब्लड शुगर को प्रभावित करता है।
हल्दी का आवश्यकता से अधिक उपयोग करने से आयरन का अवशोषण बढ़ जाता है इसलिए जिनको आयरन की कमी है उन्हें हल्दी का ज्यादा प्रयोग करने से बचना चाहिए।
अगर सर्जरी होने वाली हो तो हल्दी का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
पीलिया, पित्त की थैली में स्टोन या पित्ताशय की कोई अन्य समस्या होने पर हल्दी का ज्यादा प्रयोग ना करें।
हल्दी का आवश्यकता से अधिक प्रयोग करने से स्पर्म की सक्रियता में कमी आती है।
जिनको रक्त स्त्राव की समस्या है तो वे हल्दी का अधिक प्रयोग ना करें क्योंकि यह रक्त का थक्का बनने को धीमा कर देता है।
गर्भवती महिलाओं को आवश्यकता से अधिक हल्दी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
हल्दी के ज्यादा सेवन करने से पेट में गर्मी और दस्त लगने जैसी समस्या हो सकती है।
वैद्य या डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं।




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