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इस वजह से होता है पायरिया, जाने कारण | Is vajah se hota hai pyorrhea, jane Karan

इस वजह से होता है पायरिया, जाने कारण | Is vajah se hota hai pyorrhea, jane Karan 


पायरिया मसूड़ों और दाँतों में होने वाला एक संक्रमण होता है। यह संक्रमण दाँतों पर जमा बैक्टीरिया के कारण होता है। जब यह बैक्टीरिया दाँतों और मसूढ़ों पर जमा होते हैं तो इसके प्रभाव से मसूड़ों और दाँतों के पास सूजन आ जाती है। आगे चलकर दाँतों से खून और मवाद निकलने लगती है। तथा दाँत भी ढीले हो जाते हैं और मसूड़ों के हाथ लगाने पर दर्द महसूस होने लगता है। 
यदि मुंह की अच्छी तरह से सफाई रखी जाए और ऐसी परिस्थितियों में समय पर चिकित्सक से इलाज करवाया जाए तो दाँतों और मसूड़ों में होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है। 
इस वजह से होता है पायरिया, जाने कारण | Is vajah se hota hai pyorrhea, jane Karan

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पायरिया के लक्षण ( pyorrhea ke lakshan)

इस बीमारी में दाँतों के पास सूजन आ जाती है। यही इस बीमारी का शुरुआती लक्षण है। 
सांसों मे लगातार बदबू आती है।
भोजन खाते समय या चबाते समय दाँतों में दर्द होता है। दाँत ढीले हो जाते हैं और मसूड़ों में हिलने लगते हैं। 
मसूड़ों को हाथ से छूने और दबाने पर दर्द होता है। 
मसूड़ों से रक्त का स्त्राव होने लगता है। 
हल्के हाथ से ब्रश करने पर भी रक्त आने लगता है। 
मुंह का स्वाद बिगड़ जाता है। 
इस वजह से होता है पायरिया, जाने कारण | Is vajah se hota hai pyorrhea, jane Karan

भोजन करने के बाद दाँतों और मसूडो की अच्छी तरह से सफाई नहीं करने के कारण दाँतों के बीच की जगहों पर भोजन के टुकड़े फस जाते हैं, जिससे सड़न पैदा होती है। इस कारण दाँतों और मसूड़ों में बैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं। हालांकि पायरिया होने का सामान्य कारण यही होता है, लेकिन इसके और अन्य कारण भी है जो इस प्रकार हैं।

पायरिया होने के कारण ( pyorrhea hone ke karan)

मधुमेह 
ऐसी बहुत सी बीमारियां हैं, जिसके लक्षणस्वरूप पायरिया हो सकता है। इसमें सबसे प्रमुख है, मधुमेह। मधुमेह के कारण मसूड़ों में संक्रमण होता है और बैक्टीरिया होने पर पायरिया होने की संभावना बढ़ जाती है। 

दवाइयां  
कभी-कभी चिकित्सकों द्वारा ऐसी दवाएं लिख दी जाती है जिसके कारण से मुह में बनने वाली लार कम मात्रा में बनने लगती है। यह दवाएं है, ठंड के उपचार में काम आने वाली दवाएं, अवसाद या तनाव के इलाज में काम आने वाली दवाएं आदि। 

अनुवांशिकता 
पायरिया अनुवांशिक भी हो सकती है। कभी-कभी यह बीमारी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में भी आ सकती है।

कुपोषण 
भोजन में पौष्टिक तत्वों की कमी होने के कारण भी यह बीमारी हो सकती है। हड्डियों और दाँतों के स्वास्थ्य के लिए कैल्शियम की आवश्यकता होती है। अतः कैल्शियम और अन्य पौष्टिक तत्व विटामिन इत्यादि भोजन में शामिल ना हो तो भी यह रोग हो सकता है। 

धूम्रपान 
सिगरेट पीना और तंबाकू खाना मसूड़ों में सड़न का मुख्य कारण बन सकता है। धूम्रपान न करने वाले व्यक्तियों की तुलना में धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में पायरिया होने की संभावना ज्यादा होती है। यदि धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को पायरिया हो भी जाए तो इलाज की प्रक्रिया में समय अधिक लगता है। 

हार्मोन बदलाव 
महिलाओं में हार्मोन्स बदलने के कारण भी यह समस्या आ सकती है।
इस वजह से होता है पायरिया, जाने कारण | Is vajah se hota hai pyorrhea, jane Karan

पायरिया के जोखिम को कम करने के उपाय ( pyorrhea ke jokhim ko kam karne ke upay)

तनाव करने से आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ जाती है, इसलिए तनाव से बचना चाहिए। 
उस आहार का सेवन करना चाहिए जिसमें उचित पौष्टिकता  समाहित हो जैसे विटामिन सी, विटामिन इ, कैल्शियम और एंटी ऑक्सीडेंट वाला आहार। 
मीठे खाद्य पदार्थों का कम मात्रा में उपयोग करना चाहिए। 
अपने दाँतो और मसूड़ों की दिन में दो बार सफाई करनी चाहिए।
रोज फ्लाॅस करना चाहिए।
धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में पायरिया होने की संभावना अत्यधिक होती है। इसलिए धूम्रपान का सेवन बंद कर देना चाहिए। 
साल में दो बार दंत चिकित्सक से जांच करवाएं। 
हर 3 से 4 महीने मे टूथब्रश बदले।

इस वजह से होता है पायरिया, जाने कारण | Is vajah se hota hai pyorrhea, jane Karan

पायरिया का इलाज ( pyorrhea ka ilaj )


उपचार का मुख्य उद्देश्य दाँतों और मसूढ़ों पर जमा फ्लेक और बैक्टीरिया को हटाना होता है। 

स्केलिंग अथवा रूट प्लानिंग द्वारा 
इस प्रक्रिया में दांतों और मसूड़ों की अच्छी तरह से सफाई की जाती है। इस प्रक्रिया में दाँतों के पास जमा टार्टर तथा फ्लॉक को हटाया जाता है। 

एंटीबायोटिक दवाओं द्वारा 
स्केलिंग के साथ ही कुछ दवाओं के प्रयोग से पायरिया का इलाज किया जाता है। यह दवाएं माउथवॉश या एंटीबायोटिक्स युक्त जेल के रूप में प्रयोग की जाती है। इन दवाओं का प्रयोग दंत चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए। 

सर्जरी के द्वारा 
गंभीर परिस्थितियों में चिकित्सक द्वारा मसूड़ों को खोलकर उन्हें साफ करना पड़ता है। तत्पश्चात टांके लगाकर मसूड़ों को बंद किया जाता है। 

जिंजिवल ग्राफ्टिंग 
अगर मसूड़े खराब हो जाते हैं तो दंत चिकित्सक द्वारा खराब मसूड़ों को हटाकर मुंह के किसी स्वस्थ हिस्से से मसूड़े निकालकर खराब मसूड़ों के स्थान पर लगाया जाता है। 
बोन ग्राफ्टिंग 
यदि दाँतों में सड़न और फ्लैक के कारण हड्डी में भी कोई नुकसान हुआ है तो फ्लेप सर्जरी के साथ बोन ग्राफ्टिंग भी की जाती है।
अपने दाँतो के उपचार के लिए दंत चिकित्सक से मिले।

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