मोटापा बढने के कारण और उपाय | motapa badhne ke Karan aur upay
मोटापे को व्यक्ति के बॉडी माॅस के द्वारा मापा जाता है जो आपके वजन और लंबाई के हिसाब से बताता है कि आपके शरीर में कितनी चर्बी होनी चाहिए। इसे बीएमआई( BMI ) भी बोला जाता है।18.5 से 25 बीएमआई सामान्य
25 से 29.9 अधिक वजन
30 से अधिक बीएमआई वाले व्यक्ति को मोटापे की श्रेणी में माना जाता है।
सुंदर,आकर्षित और फिट दिखना हर व्यक्ति की अभिलाषा होती है। ज्यादातर लोग सुंदर और आकर्षक दिखने के लिए अपने चेहरे की देखभाल करते हैं। लेकिन सुंदर चेहरा होते हुए भी बेडौल शरीर के कारण व्यक्ति शारीरिक रूप से आकर्षित नहीं दिखता। आजकल की जीवनशैली के कारण मोटापा बढ़ना आम बात हो गई है। व्यक्ति अपनी शारीरिक फिटनेस पर बिल्कुल ध्यान नहीं देते। बाहर का गलत खानपान और व्यायाम नहीं करने के कारण मोटापा जैसी समस्या बढ़ती जा रही है।
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मोटापा बढने के कारण
ज्यादा खानाज्यादातर मामलों में शरीर में मोटापा बढ़ने का मुख्य कारण ज्यादा मात्रा में भोजन खाना होता है। कई लोग जब खाना खाने बैठते हैं तो अपने ऊपर संयम नहीं रख पाते और स्वाद के कारण अधिक मात्रा में खा लेते हैं। मीठा और वसा वाला खाना स्वाद में भले ही अच्छा लगे लेकिन ज्यादा मात्रा में लेने से शरीर में चर्बी बढ़ती है और मोटापे जैसी गंभीर समस्या पैदा हो जाती है।
अनुवांशिकता
मोटापा पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ सकता है और इसमें अनुवांशिक कारक भी जिम्मेदार होते हैं। ज्यादातर वे लोग परेशान रहते हैं जिनका मोटापा आनुवंशिक होता है क्योंकि जिन में इस तरह का मोटापा होता है। उनमें इसका इलाज करना लगभग असंभव सा लगता है। ऐसे लोगों को भूख बहुत ज्यादा लगती है और भूख लगभग शांत ही नहीं होती। ऐसे लोगों में मोटापे की शुरुआत बचपन से ही हो जाती है। ऐसा अनुवांशिक कारणों से होता है।
रोग या दवाई के कारण
मोटापे के कारण कई तरह की बीमारियां हो सकती है, लेकिन कभी-कभी बीमारियों के कारण या उनके इलाज के लिए प्रयोग में लाई गई दवाओं के कारण भी मोटापा बढ़ जाता है। कुछ बीमारियां जिनके कारण मोटापा बढ़ने की संभावना रहती है।
कुशिंग सिंड्रोम हाइपोथायरायडिज्म
प्रेडर विली सिंड्रोम
पालीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम
आॅस्टियोआर्थराइटिस आदि
कुछ दवाओं के कारण भी मोटापा बढ़ने की संभावना रहती है।
एंटी ड्रिपेसेट्स दवाएं
बीटा ब्लाकर्स दवाएं
एंटी साइकोटिक दवाएं
मधुमेह की दवाएं
एंटी सीजर दवाएं
सक्रियता की कमी
मोटापा एक ऐसी अवस्था है जिसमें शरीर में चर्बी की मात्रा इतनी अधिक हो जाती है कि स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाती है। ऐसी स्थिति तब आती है जब हम भोजन की मात्रा तो पूरी लेते हैं लेकिन किसी तरह का व्यायाम या टहलने जैसे कार्य नहीं करते। व्यक्ति ऑफिस या घर पर हमेशा टीवी या कंप्यूटर के सामने बिताते हैं या फिर आउटडोर गेम्स नहीं खेलते। शरीर के सक्रिय न रहने के कारण शरीर की वसा और ऊर्जा की खपत नहीं हो पाती और मोटापे जैसी गंभीर समस्या बढ़ जाती है।
असंतुलित व्यवहार और तनाव के कारण
तनाव के कारण शरीर की कार्यप्रणाली प्रभावित हो जाती है जिससे पाचन तंत्र की स्थिति भी खराब हो जाती है। इससे कई तरह के हार्मोन जैसे एड्रिलीन और कार्टीसोल का स्तर बढ़ जाता है। गलत खानपान और जीवनशैली के कारण व्यक्ति तनाव में रहता है। कई बार तनाव से ग्रसित व्यक्ति ओवरईटिंग का शिकार हो जाता है। लगातार तनाव में रहने से वजन पर असर साफ देखने को मिलता है। इस तरह से मोटापा अनियंत्रित रूप से बढ़ता है।
गलत खानपान
आजकल बड़े शहरों में बाहर खाने का चलन बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा प्रोसैस्ड फूड का उपयोग भी बहुत ज्यादा होने लगा है। प्रोसेस्ड फूड में सोडियम और सैचुरेटेड फैट ज्यादा मात्रा में होने होता है। सिचुएटेड फेट ज्यादा होने की और पौष्टिकता कम होने के कारण इस तरह का भोजन वजन बढ़ाने में सहायक होता है।
व्यायाम नहीं करना
व्यक्ति जितना चलता फिरता है या व्यायाम करता है उतना ही स्वास्थ्य रहता है। आजकल की भागदौड़ भरी जीवनशैली के कारण व्यक्ति व्यायाम नहीं कर पाते हैं। तेल में फ्राय किया हुआ और बाहर का भोजन करने से शरीर में वसा की मात्रा को कम करने के लिए व्यायाम की अति आवश्यकता होती है लेकिन लोग रात को देर तक काम करते हैं और सुबह देर तक सोते हैं। व्यायाम को समय नहीं देने कारण मोटापा बढ़ता रहता है।
समय पर खाना न खाना
समय पर खाना खाने से हमारा शरीर सक्रिय रहता है सुबह का नाश्ता छोड़कर बाहर का खाना खाने से वजन बढ़ता है। रात को डिनर समय पर नहीं करने से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ती है। समय पर खाना नहीं खाने से व्यक्ति अनियंत्रित रूप से खाना खाता है और मोटापा बढ़ने की समस्या पैदा हो जाती है।
मोटापा के कारण होने वाली बीमारियां
लकवा, ह्रदय रोग, मधुमेह, कमर दर्द, अनिद्रा, कैंसर, उच्च रक्तचाप, प्रजनन क्षमता में कमी, लीवर की बीमारी, स्ट्रोक आदि
वजन संतुलित रखने के उपाय
नाश्ते में अंकुरित अनाज या सलाद ले
एक बार में अत्यधिक खाने के बजाय थोड़ा-थोड़ा खाना खाए
मीठा खाना खाने से परहेज करें
तला हुआ अथवा फास्टफूड नहीं खाए
मौसम के अनुसार सब्जी,फल और फलों के जूस का सेवन करें
फाइबर वाले भोजन का प्रयोग करें
धूम्रपान व शराब का सेवन बंद कर देना चाहिए
बिना फेट या कम फेट का दूध का सेवन करें
तेल घी आलू और चावल का सेवन कम करें
रोज टहलने जाए या हल्का व्यायाम करें
पूरी नींद लें
लिफ्ट की जगह सीढियों का प्रयोग करें
उपचार के तरीकों की जानकारी
दवा द्वारा
वजन कम करने के अन्य तरीके काम नहीं करते तो डॉक्टर द्वारा दवाओं का प्रयोग किया जाता है। दवाएं वसा का अवशोषण करने और भूख कम करने का कार्य करती है। इन दवाओं के नियमित प्रयोग से कुछ साइड इफेक्ट हो सकते हैं।
सर्जरी द्वारा मोटापा कम करना
गैस्ट्रिक बायपास सर्जरी
यदि आपके शरीर का बीएमआई (BMI) 40 से अधिक है तो डॉक्टर द्वारा गैस्ट्रिक बायपास सर्जरी की सिफारिश की जाती है इस प्रक्रिया में पाचन तंत्र में कुछ संशोधन किए जाते हैं ताकि भोजन की मात्रा सीमित मात्रा में उपयोग हो सके।
लेप्रोस्कोपिक एडजेस्टेबल बैंडिंग
इस सर्जरी में पेट के ऊपरी भाग के आसपास लेप्रोस्कोपिक तकनीक द्वारा एक एडजेस्टेबल बेंड लगाया जाता है जो कि भोजन की मात्रा को सीमित करता है जिससे आप भोजन की कम मात्रा लेकर महसूस कर सकते हैं।
गैस्ट्रिक स्लीव
इस सर्जरी में पेट के अधिकांश हिस्से को हटा दिया जाता है यहां पेट को एक वर्टिकल ट्यूब में बदल दिया जाता है। यहां मरीज के पेट को उतना खाना नहीं मिल पाता जितना वह पहले खा रहा था। कम कैलोरी और अवशोषण के कारण मस्तिष्क और पेट के बीच भेजे गए हार्मोनल बदलाव आएंगे जिससे मोटापे मे कमी आएगी।
एब्डोमिनोप्लास्टी
पेट पर बहुत ज्यादा चर्बी जमा हो जाने पर, पेट नीचे लटकने लगता है। सर्जरी द्वारा पेट की चर्बी, उतको और त्वचा को हटा दिया जाता है।



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